My Frist Poetry
Written By :- Vivek Kumar Mandal
Source :- Dear Komal
हा माना की तुम मेरी चाहत हो
हा माना की तुम मुझे अच्छी लगती हो
पर तुम से शायद हम बता नहीं पाएंगे
की तुम एक जन्नत की परी लगती हो
रोज सुबह घर से जल्दी निकल कर
एक नज़र तुम्हे देखना चाहते है
जब तुम मुझसे बात करती हो तो
हम तुम से नजरे चुराते है
फिर कही किसी ख्याल में खो जाते है
हाँ माना की तुम मुझे अच्छी लगती हो
पर तुम से शायद हम बता नहीं पाएंगे
यू तो तुमसे मुलाकाते रोज होती है
मगर इसका जिक्र किसी से किया नहीं
जब एक दिन पता चलेगा सबको
तब तुम्हारे सामने आने से मैं डरूंगा नहीं
हाँ माना की तुम मुझे अच्छी लगती हो
पर तुम से शायद हम बता नहीं पाएंगे
हमने खुद से ही पूछा कई दफ़ा
लेकिन अपने लबो पर किसी और का नाम आया ही नहीं
और हमेसा ये दिल कहत्ता है की
तुम्हारे सिवा हमने किसी का इंतजार किया नहीं
इन नजरो में कोई दूजा घर किया नहीं
पर ये सब तुम से कभी......
शायद मैं कह नहीं पाउगा
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